Sunday, 18 October 2020

Murli Saar – 19th Oct’20

मीठे बच्चे - तुम्हें अभी बहुत-बहुत साधारण रहना हैफैशनेबुल ऊंचे कपड़े पहनने से भी देह-अभिमान आता है

  1. बाबा कहते बच्चे अपना सुधार करने के लिए चार्ट रखो याद का चार्ट रखने में बहुत फायदा है। नोट बुक सदा हाथ में हो। चेक करो कितना समय बाप को याद कियाहमारा रजिस्टर कैसा हैदैवी कैरेक्टर हैकर्म करते बाबा की याद रहती हैयाद से ही कट उतरेगीऊंच तकदीर बनेगी
  2. मीठे-मीठे बच्चों पास यह लक्ष्मी-नारायण का चित्र घर में जरूर होना चाहिए। सबके लिए यह एक ही उद्देश्य है
  3. जरूर भक्तों पर कोई आपदायें हैं। विकारों की आपदायें सबके ऊपर हैं
  4. जब ज्ञान मिलता है तो फिर भक्ति नहीं रहती। तुम सुखधाम के मालिक बनते हो। आधाकल्प के लिए सद्गति मिल जाती है
  5. काम पर जीत पाने से तुम जगतजीत बनेंगे
  6. तुम्हारा ज्ञान और योग सारा गुप्त है स्थूल हथियार आदि कुछ नहीं हैं। बाप समझाते हैं यह है ज्ञान तलवार। उन्होंने फिर स्थूल हथियार निशानियाँ देवियों को दे दी हैं
  7. यह तुम्हारी बात बहुत ढेर मनुष्य सुनेंगे विद्वान आदि भी एक दिन आयेंगे। बेहद का बाप है ना। तुम बच्चों को श्रीमत पर चलने में ही कल्याण है तब देह-अभिमान टूटेगाइसलिए साहूकार लोग आते नहीं हैं। बाप कहते हैं देह अहंकार को छोड़ो। अच्छे कपड़े आदि का भी नशा रहता है
  8. दिन प्रतिदिन यह हंगामा आदि ज्यादा बढ़ता जायेगा इसलिए बाप कहते हैं अपने को आत्मा समझ मुझे याद करो। देह-अभिमान में आने से बाप को भूल जायेंगे। यह मेहनत अभी ही मिलती है
  9. लड़ाई भी जरूर होगी। एटॉमिक बाम्ब्स आदि खूब बनाते रहते हैं कितना भी माथा मारो कि यह बन्द हो जाए परन्तु ऐसे हो नहीं सकता। ड्रामा में नूँध है। समझाने से भी समझेंगे नहीं। मौत होना ही है तो बन्द कैसे होगा
  10. यादवों और कौरवों को खलास होना ही है। यादव हैं यूरोपवासी। उन्हों का है साइन्स घमण्डजिससे विनाश होता है। फिर जीत होती है साइलेन्स घमण्ड की। तुमको शान्ति घमण्ड में रहना (शान्त स्वरूप रहनासिखाया जाता है। बाप को याद करो - डेड साइलेन्स
  11. हम आत्मा शरीर से न्यारी हैं। शरीर छोड़ने के लिए जैसे हम पुरूषार्थ करते हैंऐसे कभी कोई शरीर छोड़ने के लिए पुरूषार्थ करते हैं क्या?
  12. सारी दुनिया ढूँढकर आओ - कोई है जो बोले - हे आत्मा अब तुमको शरीर छोड़ जाना है। पवित्र बनो। नहीं तो फिर सज़ा खानी पड़ेगी सज़ा कौन खाते हैंआत्मा। उस समय साक्षात्कार होता है। तुमने यह-यह पाप किये हैंखाओ सज़ा
  13. बाप कहते हैं - अभी कोई पाप कर्म नहीं करो। अपना चार्ट देखो - कितना समय बाप को याद किया
  14. कर्म करते हुए भी बाप को याद करना है तो पुरूषार्थ का फल मिल जायेगा। मेहनत है ना ऐसे ही थोड़ेही ताज रख देंगे सिर पर
  15. वह बेहद का बाप ही पतित-पावनसुख का सागर है। उनसे ही सुख घनेरे मिलते हैं
  16. जन्म-जन्मान्तर के लिए तुमको महल मिलते हैं। सुदामा का मिसाल है ना
  17. तुम जानते हो - शिवबाबा को जो देते हैं वह सब हमारे ही काम में लगाते हैं। शिवबाबा तो अपने पास रखते नहीं हैं
  18. इनको भी कहा सब कुछ दे दो तो विश्व के मालिक बन जायेंगे
  19. जितना पुरूषार्थ करेंगे उतना ऊंच पद पायेंगे
  20. तुमको अब भोलानाथ बाप मिला है। कितना भोला है। तुमको क्या बनाते हैं। कखपन के बदले तुमको 21 जन्म के लिए क्या बना देते हैं मनुष्यों को कुछ भी पता नहीं
  21. परन्तु यह भी किसको पता नहीं है कि भगवान किसको कहा जाता है। कोई से भी पूछो - परमपिता परमात्मा को जानते होबाप है बागवान। तुमको कांटों से फूल बना रहे हैं
  22. जो खुद जाग जाते हैं तो दूसरों को भी जगाते हैं। नहीं जगाते हैं तो गोया खुद जगा हुआ नहीं है
  23. रात के राही थक मत जाना - यह भी अच्छा है
  24. बाप कहते हैं यह साक्षात्कार आदि की सब ड्रामा में नूँध है। जो भावना रखते हैं उसका साक्षात्कार हो जाता है

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) बुद्धि में सदा अपनी एम ऑब्जेक्ट याद रखनी है। लक्ष्मी-नारायण का चित्र सदा साथ रहेइसी खुशी में रहो कि हम ऐसा बनने के लिए पढ़ रहे हैंअभी हम हैं गॉडली स्टूडेन्ट

2) अपना पुराना कखपन चावल मुट्ठी दे महल लेने हैं। ब्रह्मा बाप को फालो कर अविनाशी ज्ञान रत्नों का जौहरी बनना है

वरदान:- अशरीरी पन के इन्जेक्शन द्वारा मन को कन्ट्रोल करने वाले एकाग्रचित्त भव

जैसे आजकल अगर कोई कन्ट्रोल में नहीं आता हैबहुत तंग करता हैउछलता है या पागल हो जाता है तो उनको ऐसा इन्जेक्शन लगा देते हैं जो वह शान्त हो जाए। ऐसे अगर संकल्प शक्ति आपके कन्ट्रोल में नहीं आती तो अशरीरीपन का इन्जेक्शन लगा दो। फिर संकल्प शक्ति व्यर्थ नहीं उछलेगी। सहज एकाग्रचित हो जायेंगे। लेकिन यदि बुद्धि की लगाम बाप को देकर फिर ले लेते हो तो मन व्यर्थ की मेहनत में डाल देता है। अब व्यर्थ की मेहनत से छूट जाओ

स्लोगन:- अपने पूर्वज़ स्वरूप को स्मृति में रख सर्व आत्माओं पर रहम करो